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हड़प्पा सभ्यता का सबसे बड़ा शहर धोलावीरा

हड़प्पा सभ्यता से संबंधित यह स्थल गुजरात के कच्छ जिले में स्थित है। 100 हेक्टेयर ने फैले इस स्थल की खोज वर्ष  1967 -  68 ईस्वी में जे.पी.जोशी ने की थी। यह भारत में स्थित सिंधु सभ्यता का दूसरा सबसे बड़ा नगर था जो तीन भागों में विभाजित था- दुर्ग, मध्यम नगर और निचला नगर। यहां विश्व की सबसे पुरानी जल संरक्षण प्रणाली मिली है जहाँ वर्षा जल का संचयन किया जाता था। धोलीवारा में कलात्मक मृदभांड, विशिष्ट कलात्मक मुद्रायें, तौल के बाट, लिपिगत लेख, शंख, तांबे व मिट्टी की चूड़ियां प्राप्त हुए हैं। पत्थर से निर्मित स्थापत्य नमूनों के कुछ अवशेषों जिनमें पीली व बैंगनी रंग की धारियां निर्मित हैं धोलीवारा की महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों में से हैं।

प्रागैतिहासिक स्थल अदिचनल्लूर

अदिचनल्लूर, तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले में स्थित है। इसका उत्खनन जर्मन पुरातत्वविद डॉ. जागोर  और बाद में एक अंग्रेज पुरात्तवविद  अलेक्जेंडर रे ने करवाया था। यह कार्य वर्ष 1876 और 1905 के बीच हुआ। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की वर्ष 1902-1903 की वार्षिक रिपोर्ट में अलेक्जेंडर रे ने दक्षिण भारत में खोजे गए इस स्थल को सबसे व्यापक प्रागैतिहासिक स्थल के रूप में बताया है। उत्खनन में यहां सोना और तांबा मिला था। वहीं, साल 2004 में यहां पर की गई खुदाई में बड़ी मात्रा में मिट्टी के बड़े-बड़े कलश में मानव कंकाल बरामद किए गए थे। शोध में पता चला था कि ये सभी कंकाल 3,800 साल पुराने थे।

नारद संवाद

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