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रबी की फसलों पर MSP भुगतान के लिए किसानों की बायोमैट्रिक पहचान हुई शुरू

रबी की प्रमुख फसल गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होने से पहले केंद्र सरकार द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इस पूरे सीजन में देशभर के किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य(MSP) पर सीधे खरीदे गए अनाज के दाम का भुगतान सीधे किसानों के खाते में हो। इसके लिए राज्यों में MSP पर खरीद के लिए किसानों की बायोमेट्रिक पहचान की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे असली किसानों की पहचान करना आसान होगा और MSP पर खरीद की व्यवस्था में और अधिक पारदर्शिता आएगी। इस विषय में केंद्र सरकार में खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने बताया कि MSP पर खरीद के लिए किसानों की बायोमेट्रिक पहचान उत्तर प्रदेश, ओडिशा, बिहार और राजस्थान में शुरू कर दी गई है। रबी विपणन सीजन 2021-22 की शुरुआत एक अप्रैल से होगी। 

केंद्र सरकार में खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने कहा कि MSP पर अनाज खरीद से लेकर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लाभार्थियों के बीच उसके वितरण की पूरी व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता लाने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए अनाज की खरीद, गोदामों के प्रबंधन से लेकर अन्न वितरण तक की पूरी व्यवस्था को एकीकृत करने का प्रयास किया जा रहा है। 

राशन के आने से लेकर बंटने तक का पूरा ब्यौरा रहेगा उपलब्ध

खाद्य सचिव ने कहा, "भारतीय खाद्य निगम का अपना जो डिपो मैनेजमेंट है वह ऑनलाइन है और राज्य सरकारों के भी अधिकांश वेयरहाउसेस ऑनलाइन हैं। अन्न वितरण प्रणाली भी ऑनलाइन है जहां उचित मूल्य की दुकान (राशन की दुकान) से अनाज वितरण के बाद उसका डाटा मिल जाता है। ऐसे में इन सबकों निर्बाध तरीके से जोड़ने का काम चल रहा है, जिससे, कहां से अनाज की कितनी खरीद हुई और किस गोदाम में कितना अनाज रखा गया और वहां से किस राशन की दुकान में कब कितना अनाज पहुंचा और वहां कब कितना बंटा, इसकी पूरी निगरानी ऑनलाइन रखी जाएगी। 

इन चार राज्यों में हुई शुरुआत

खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने बताया कि एमएसपी पर खरीद के लिए किसानों की बायोमेट्रिक पहचान उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, और ओडिशा में शुरू की गई है। पंजाब में अब तक किसानों को एमएसपी का भुगतान आढ़तियों के जरिए ही हो रहा है, जबकि हरियाणा में एमएसपी का भुगतान किसानों के खाते में आंशिक रूप(या तो आढ़ती के द्वारा या फिर सीधा किसान के खाते में) वाले विकल्प के चुनाव से होता है।

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