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गौ सेवा सदभावना यात्रा पर निकले मुहम्मद फैज खान

गौ सेवा सदभावना यात्रा पर निकले मुहम्मद फैज खानमंडी। धर्म से मुस्लिम लेकिन मकसद केवल एक और वह है प्यार। प्यार भी किससे, गाय से। गाय कभी नफरत की वस्तु हो ही नहीं सकती, गाय तो प्रेम का दूसरा रूप है, इसी संदेश को लेकर गौ सेवा सदभावना पदयात्रा पर निकले छत्तीसगढ़ रायपुर के मुहम्मद फैज खान मंगलवार को मंडी पहुंचे। 38 साल के मुहम्मद फैज खान राजनीति विज्ञान के विख्याता यानि कॉलेज लेक्चचर थे जिन्होंने पांच साल पहले सरकारी कॉलेज की नौकरी छोड़ कर पूर्णकालिक गौ सेवा में अपने को लगा दिया। 

 

विशेष भेंट में उन्होंने बताया कि देशभर के मुसलमानों में गौ के प्रति जागृति पैदा करने के इरादे से वह काम कर रहे हैं और पूर्णकालिक गो सेवा में आने के बाद वह गो कथाएं कर रहे हैं, गौशालाओं की स्थापना करवा रहे हैं और गौ के गोबर पर आधारित खेती के कार्य में जुटे हैं। अब तक देश भर में 500 से अधिक गौ कथाएं व व्याख्यान कर चुके हैं। मुहम्मद फैज खान गाय और इसलाम पर एक पुस्तक भी लिख चुके हैं।

 

गो सदभावना को लेकर भारत भ्रमण - 

उनका कहना है कि गाय कभी नफरत की वस्तु हो ही नहीं सकती यह तो प्रेम का ही रूप है। इस समय जो गाय के नाम पर देश में कुछ लोग नफरत व हिंसा फैलाने में लगे हैं यह दुखदायी है और इसी को देखते हुए उन्होंने भारत भ्रमण करने की योजना बनाई जिसके तहत गो सेवा सदभावना यात्रा शुरू की। यह यात्रा उन्होंने 24 जून को लेह लदाख से सिंधु नदी का जल लेकर शुरू की। हर रोज लगभग 25 किलोमीटर पैदल यात्रा करते हैं। एक साल बाद उनकी यात्रा कन्याकुमारी पहुंचेगी जहां सिंधु नदी का जल हिंद महासागर में डालेंगे और वहां से हिंद महासागर का जल लेकर वापसी शुरू करेंगे जो एक साल बाद पंजाब के अमृतसर में यह सदभावना पदयात्रा पहुंचेगी।कैसा रहा लेह से मंडी तक का सफर -

लेह से लेकर मंडी तक लगभग 600 किलोमीटर की यात्रा के अनुभव पर उन्होंने कहा कि यह पूरा इलाका पहाड़ी था और यहां पर गाय के प्रति किसी तरह की सदभावना की जरूरत ही नहीं है। यहां के लोग गाय, नारी और प्रकृति के प्रेमी हैं। जगह जगह महिलाएं ढावों में काम करती नजर आई, खेतों में महिलाएं काम में जुटी दिखीं, हर कार्य में महिलाएं आगे नजर आईं,साफ लगा कि जहां पर गाय का सम्मान होगा वहां निश्चित रूप से लोगों में प्यार भाईचारा होगा। उन्होंने बताया कि उनके साथ दो सहयोगी हैं। मध्यप्रदेश देवास के रूपेश पंडित वत्स यात्रा व खानपान की सारी व्यवस्था देखते हैं जबकि राजस्थान के कैलाश मोहन द्वारा प्रदत वाहन के सारथी कैलाश साथ साथ चलते हैं।नामधारी ट्रस्ट के सदस्यों ने किया भव्य स्वागत -

वह सोमवार रात को मंडी पहुंचे तो नामधारी ट्रस्ट रामनगर मंडी के सदस्यों ने उनका भव्य स्वागत किया व रात्रि ठहराव व खान पान की भी व्यवस्था की। नामधारी धर्मशाला में ही गोकथा व प्रवचन का कार्यक्रम भी हुआ। उनका एक ही मकसद है कि गाय को लेकर पूरे समाज में, हर वर्ग में, हिंदु मुसलमान व अन्य महजबों में नफरत नहीं प्यार होना चाहिए। गाय पूजनीय है, प्रेम है और इसके साथ नफरत का शब्द नहीं जुडऩा चाहिए।

 

 

साभार-khaskhabar.com 

 

 

 

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