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लखनऊ । योगी आदित्यनाथ ने पूर्व सीएम अखिलेश यादव के एक और ड्रीम प्रोजेक्ट पर हथौडा चला दिया है। योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस की जांच के आदेश दिए हैं। इस बारे में योगी सरकार ने इस जिलों के डीएम को पत्र लिखकर आदेश दिए हैं कि वे पिछले 18 महीने में हुए जमीन खरीद के हर मामले की जांच करें। इस जांच में एक्सप्रेस वे किनारे के करीब 230 गांव आएंगे।
ज्ञातव्य है कि आरोप है कि कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए उनकी कृषि वाली जमीन को रिहाइशी जमीन की श्रेणी में दिखाया गया है, ताकि उन्हें सरकार से ज्यादा मुआवजा मिल सके। साथ ही योगी सरकार ने इस एक्सप्रेस वे के सर्वे के लिए सरकारी सर्वे एजेंसी RITES से संपर्क किया है।
चुनाव से पहले सुर्खियों में रहा एक्सप्रेस वे:
यूपी विधानसभा चुनावों के प्रचार के दौरान लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे काफी सुर्खियों में रहा। चुनाव प्रचार के दौरान अखिलेश सरकार इस एक्सप्रेस वे को उनकी सरकार की बडी उपलब्धि के बता रही थी तो बीजेपी इस एक्सप्रेस वे में घोटाले का आरोप लगा रही थी। ज्ञातव्य है कि चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने कहा था कि यदि पीएम मोदी इस एक्सप्रेस वे पर चलेंगे तो वह समाजवादी पार्टी को ही वोट देंगे। अब योगी सरकार ने इस एक्सप्रेेस वे की जांच के आदेश दिए हैं।
302 किमी लंबा है लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे:
ज्ञातव्य है कि लखनऊ-आगरा के बीच छह लेन वाला यह एक्सप्रेस वे 302 किमी लम्बा है। इस प्रक्सप्रेस पे पर उन्नाव में हवाई पट्टी बनी है, जहां जरूरत पडऩे पर लड़ाकू विमान भी उतारे जा सकते हैं। यह हवाई पट्टी तीन किलोमीटर लंबी है। इस एक्सप्रेस वे परियोजना के लिए 10 जिलों के 232 गांवों में लगभग 3,500 हेक्टेयर भूमि 30,456 किसानों की सहमति से खरीदी गई। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 11526.73 करोड़ रुपये तय की गई थी।
साभार-khaskhabar.com













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