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डीसी मणिराम शर्मा ने बदल दी दिव्यांगों की जिंदगी

डीसी मणिराम शर्मा ने बदल दी दिव्यांगों की जिंदगीनूंह । जिले के पढ़े -लिखे दिव्यांग अब घर वालों पर बोझ नहीं हैं। इन दिनों जिले के दिव्यांगों के अच्छे दिन चल रहे हैं। दिव्यांगों को पढा़ई , नौकरी , लेपटॉप , स्कूटी जैसी सुविधाएं धड़ल्ले से मुहैया कराई जा रही हैं। दिव्यांगों को मिल रहे सम्मान से उनके परिवार बेहद उत्साहित हैं। समाज में भी दिव्यांगों की छवि लगातार बेहतर हो रही है। ये सब कुछ संभव हो पाया है नूंह के उपायुक्त मनीराम शर्मा की बदौलत। उन्होंने खुद दिव्यांगता को नजदीक से महसूस किया। उन्हें नूंह जिले में डीसी के पद पर सौभाग्य मिला, तो उन्होंने सैंकड़ों दिव्यांगों के जीवन में बदलाव लाकर खुशियां ही खुशियां भर दीं। 

नूंह जिला देश भर में एकमात्र ऐसा जिला है ,जहां दिव्यांग छात्रों को सबसे ज्यादा ख़ुशी मनाने और आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। गत राष्ट्रीय विकलांग दिवस के मौके पर तो दिव्यांगों को उपायुक्त मनीराम शर्मा ने उस मंच पर बैठने और भाषण देने का मौका दिया , जहां मंत्री और बड़े अधिकारी अकसर बैठते हैं। ताज्जुब इस बात का है कि स्वयं उपायुक्त मनीराम शर्मा और उनकी टीम के आला अधिकारी कार्यक्रम के दौरान नीचे आम दिव्यांगों की भीड़ में बैठे। दिव्यांगों पर डीसी की इतनी मेहरबानी देख दिव्यांगों की छाती चौड़ी हो गई। आपको बता दें कि डीसी मनीराम शर्मा आईएएस अधिकारी हैं। उन्हें पहले मेवात जिले में एडीसी के पद पर काम करने का मौका मिला और यहीं पर वे डीसी बन गए। कई साल से मेवात जिले में वे कार्यरत हैं। उनके मन में दिव्यांगों के जीवन में ख़ुशी लाने और उन्हें परिवार पर बोझ नहीं बनने देने की ललक पहले दिन से ही दिखी। एडीसी के पद पर रहते हुए तो मनीराम शर्मा कुछ खास नहीं कर पाए , लेकिन डीसी बने तो मानो दिव्यांगों के नसीब जाग गए। 

क्या है खास

उपायुक्त मनीराम शर्मा कालेज एवं स्कूल में पढ़ने वाले तक़रीबन आधा दर्जन से अधिक दिव्यांग छात्रों को अपने निजी प्रयासों से स्कूटी दिलवा चुके हैं। नगीना में उनके प्रयासों ने श्रवण एवं वाणी निशक्तजन कल्याण समिति की मदद से प्रदेश का सबसे मॉडल मूक -बधिर स्कूल खुलवा चुके हैं। नूंह के समीप मरोड़ा गांव की करीब 7 एकड़ जमीन में दिव्यांगों के स्कूल की प्लानिंग चल रही है। सात दिव्यांगों को मेवात विकास अभिकरण में अब तक नोकरी दिलवा चुके हैं। दस दिव्यांगों को जल्द नोकरी दिलवाने की बात सामने आई है। आगामी सत्र से डीसी रेट की नोकरियों में 5 फीसदी नोकरी दिव्यांगों को दिलाने का भरोसा मिल चुका है। दिव्यांग परिवार को बीपीएल की सूचि में शामिल करने की योजना पर काम चल रहा है। 15 लेपटॉप और कान की मशीन दिव्यांगों को मिल चुकी हैं। कुछ दिव्यांग छात्रों को अंग्रेजी भाषा के ज्ञान के लिए मशीन मिलने की बात सामने आई है। इसके अलावा कुछ लेपटॉप भी दिव्यांगों को देने की बात है। 

क्या कहते हैं दिव्यांग

दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने से लेकर नोकरी दिलाने में अहम भूमिका अदा करने वाले अध्यापक तारकेश्वर पांडेय के अलावा दिव्यांग छात्र शौकीन कोटला ने उपायुक्त मनीराम शर्मा की जमकर प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने जीवन में कभी सोचा भी नहीं था , कि उन्हें इतनी सुविधा कभी मिल पाएंगी। डीसी मनीराम शर्मा ने दिव्यांगों की जो मदद की है , उससे समाज की सोच में भी बदलाव आया है। दिव्यांग किसी से कम नहीं हैं। दिव्यांग किसी पर बोझ नहीं है। पढ़ाई से लेकर नोकरी तक के अवसर उन्हें आसानी से मुहैया हो रहे हैं। उपायुक्त मनीराम शर्मा को जिले के दिव्यांग और उनके परिवार मरते दम तक नहीं भुला पाएंगे। 

साभार-khaskhabar.com

 

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