देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreनई दिल्ली। हिंदी दिवस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा एक देश-एक भाषा के सिद्धांत का पक्ष लिए जाने के बाद अब दक्षिण भारत के राजनीतिक दल इसके विरोध में उतर आए हैं। अब दक्षिण के सुपरस्टार और पिछले साल ही राजनीति में कदम रखने वाले कमल हासन ने भी इस मसले पर ट्वीट किया है। कमल ने एक वीडियो ट्वीट कर कहा है कि देश में एक भाषा को थोपा नहीं जा सकता है, अगर ऐसा होता है तो इस पर बड़ा आंदोलन होगा।
कोई शाह, सुल्तान या सम्राट अचानक वादा नहीं तोड़ सकता। वर्ष 1950 में जब भारत गणतंत्र बना तो ये वादा किया गया था कि हर क्षेत्र की भाषा और संस्कृति का सम्मान किया जाएगा और उन्हें सुरक्षित रखा जाएगा। कई राजाओं ने राजपाठ देश की एकता के लिए न्यौछावर कर दिया, लेकिन लोग अपनी भाषा, कल्चर और पहचान को खोना नहीं चाहते हैं।
भारत ऐसा देश है जहां लोग एक साथ बैठकर खाते हैं। किसी पर कुछ थोपा नहीं जा सकता है। तमिल को लंबे समय तक जीने दो, देश को समृद्ध होने दो। राष्ट्रगान भी बांग्ला में होता है, उनकी मातृभाषा में नहीं। वह जिस बात का प्रतीक है, उसकी वजह से हम उसे गाते हैं और इसलिए क्योंकि जिस शख्स ने उसे लिखा वह हर भाषा को अहमियत और सम्मान देते थे।
कोई भी नया कानून या स्कीम लाने से पहले आम लोगों से बात करनी चाहिए। जलीकट्टू के लिए जो हुआ वह सिर्फ एक प्रदर्शन था, लेकिन भाषा को बचाने के लिए जो होगा वह इससे बड़ा होगा। हालांकि भाजपा को कमल हासन का विरोध पचा नहीं। भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी ट्वीट से जवाब दिया। उन्होंने लिखा कि कमल हासन, एमके स्टालिन हिंदी थोपने की बात कर रहे हैं। तमिलनाडु में हिंदी नहीं पढ़ाने को लेकर वो क्या कहेंगे? हिंदी को भी तमिलनाडु में वैकल्पिक भाषा बनने देना चाहिए। गौरतलब है कि असदुद्दीन ओवैसी समेत विपक्ष के कई बड़े नेताओं ने शाह की निंदा की थी।
साभार-khaskhabar.com













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