BREAKING NEWS

स्विट्ज़रलैंड: पहाड़ों पर कुदरत का करिश्मा, मशीनों का जलवा और हम सबको ‘आज खाने में क्या है की चिंता?’ || लखनऊ : अखिलेश का दावा, SIR पर चुनाव आयोग में ही मतभेद, बताया- लोकतंत्र के लिए घातक || चेन्नई : राहुल गांधी अगले महीने तमिलनाडु में कर सकते हैं 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम || उत्तर प्रदेश : गोंडा में मुठभेड़ के बाद तीन गौतस्कर गिरफ्तार, बहराइच में शातिर अपराधी पुलिस की गोली लगने से घायल

सचिन ने कहा, पुरुषों को अगर रोना आए तो रोना चाहिए, शर्म जैसी कोई बात नहीं

नई दिल्ली। दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने इंटरनेशनल मेंस वीक के अवसर पर सभी लडक़ों और पुरुषों के नाम एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने पुरुषों से मजबूत बनने के लिए भावनाओं का खुलकर इजहार करने का अनुरोध किया और कहा कि पुरुषों को अगर रोना आए तो रोना चाहिए। पुरुषों के लिए ऐसा करना सही है। सचिन ने अपने करियर में पहली बार पुरुषों और युवा लडक़ों के लिए एक खुला पत्र लिखा है।

उन्होंने अपने इस पत्र में कहा कि पुरुषों को अपनी भावनाओं को छिपाना नहीं चाहिए और मुश्किल पलों में यदि वे भावुक हो जाएं तो अपने आंसुओं को बहने दें। सचिन ने पत्र में लिखा, आप जल्द ही पति, पिता, भाई, दोस्त, मेंटर और अध्यापक बनेंगे। आपको उदाहरण तय करने होंगे। आपको मजबूत और साहसी बनना होगा। उन्होंने कहा, आपके जीवन में ऐसे पल आएंगे, जब आपको डर, संदेह और परेशानियों का अनुभव होगा।

वह समय भी आएगा जब आप विफल होंगे और आपको रोने का मन करेगा। दिग्गज बल्लेबाज ने आगे लिखा, यकीनन ऐसे समय में आप अपने आंसुओं को रोक लेंगे और मजबूत दिखाने का प्रयास करेंगे, क्येंकि पुरुष ऐसा ही करते हैं। पुरुषों को इसी तरह बड़ा किया जाता है कि पुरुष कभी रोते नहीं। रोने से पुरुष कमजोर होते हैं। मैं भी यही सोचते हुए बड़ा हुआ था। लेकिन, मैं गलत था। उन्होंने कहा कि मैं अपने जीवन में कभी भी 16 नवंबर 2013 की तारीख को भूल नहीं सकता। मेरे लिए उस दिन आखिरी बार पैवेलियन लौटना बहुत मुश्किल था और दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था। मेरा गला रुंध गया था लेकिन फिर अचानक मेरे आंसू दुनिया के सामने बह निकले और हैरानी की बात है कि उसके बाद मैंने शांति महसूस की। अपने आंसुओं को दिखाना कोई शर्म की बात नहीं है। अपने व्यक्तित्व के एक हिस्से को क्यों छिपाना जो वास्तव में आपको मजबूत बनाता है।

 साभार-khaskhabar.com

 

नारद संवाद

देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि

Read More

हमारी बात

स्विट्ज़रलैंड: पहाड़ों पर कुदरत का करिश्मा, मशीनों का जलवा और हम सबको  ‘आज खाने में क्या है की चिंता?’

Read More

Bollywood


विविधा


शंखनाद

राइन फॉल्स, स्विस सीढ़ियाँ और बुज़ुर्ग घुटने: नाव की सैर बनी ओलंपिक प्रतियोगिता!

Read More