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संविधान को केंद्र बिंदु बनाकर भविष्य की ओर देखना होगा - सचिन पायलट

जयपुर। उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने विधानसभा में कहा कि हमें संविधान को केंद्र बिंदु बनाकर भविष्य की ओर देखना होगा। पायलट गुरुवार को विधानसभा में भारतीय संविधान को अंगीकृत करने के 70 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारत के संविधान तथा मूल कर्तव्यों पर चर्चा हुई चर्चा के दौरान बोल रहे थे।
उप मुख्यमंत्री ने संविधान निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने देश की उस समय की परिस्थितियों और चुनौतियों के बीच सर्वश्रेष्ठ संविधान हमें दिया। उनकी दूरगामी सोच ने देश को प्रगतिशील बनाया। उस पीढ़ी के बताए रास्ते पर चलकर हम यहां तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि उस समय आपसी मतभेदों को अलग रखकर दुनिया के संविधानों का अध्ययन कर सर्वश्रेष्ठ अनुच्छेदों का हमारे संविधान में समावेश किया। समाज में हुए परिवर्तनों के हिसाब से संविधान में लगभग एक सौ बार संशोधन किए गए। पंचायती राज, सौ दिन का रोजगार, शिक्षा का अधिकार एवं सूचना का अधिकार जैसे हक प्रदान कर लोकतंत्र को मजबूत किया गया।
पायलट ने कहा कि संविधान की गरिमा और सिद्धान्तों की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हमसे जो गलतियां हुई हैं, उन्हें भूलकर सुधार कर आगे बढ़ना होगा। हमें संविधान पर केवल भाषण ही नहीं देने हैं, बल्कि अपनी आत्मा में उतारना होगा। अपनी कार्यप्रणाली में दर्शाना होगा तथा संविधान के साथ छेड़छाड़ की भावना रखने वालों को रोकना होगा। हमें महात्मा गांधी के आदर्श और विचारों को अपनाकर उसी के अनुसार दृष्टि विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि देश को सम्पन्न बनाने के संकल्प पर आत्मचिंतन कर गरीब-अमीर की खाई को पाटना होगा। तेरा-मेरा की बजाय हम और हमारी बात करनी होगी। उन्होंने कहा कि जो भी गांधी जी के विचारों को मानता है, उसे राष्ट्रपिता के हत्यारे को देशभक्त बताने वाले को गलत ठहराना होगा।
उन्होंनेे कहा कि देश की राजनीति में घृणा का कोई स्थान नहीं है। हमारा संविधान हम लोगों की आवाज को दबाना-कुचलना नहीं सीखाता है। गरीब, पिछड़े, दबे, कुचले वर्गों के आरक्षण जैसे हकों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकता है, यह संकल्प हमें दोहराना होगा। उन्होंने बाबा साहेब अम्बेडकर को उद्धृत करते हुए कहा कि राजनीति में भक्ति और नायक को पूजा पतन की ओर ले जाती है। इसलिए हमें इससे बचना होगा।
उन्होंने सदस्यों का आह्वान करते हुए कहा कि हमें संविधान की बनाई ‘चेक एंड बैलेंस’ की व्यवस्था को मजबूत बनाना होगा। उन्होंने कहा कि संविधान सभा की चर्चा के दौरान जो प्रस्ताव रखे गए, उन पर सार्थक चर्चा हुई और कुछ प्रस्ताव पारित हुए, वहीं कुछ वापिस लिए गए। हमें वाद-विवाद की इस स्वस्थ एवं अच्छी परम्परा को मजबूत करना होगा।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रवाद का मतलब सिर्फ नारे लगाना, भाषण देना और प्रमाण पत्र वितरित करना नहीं है, बल्कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना सच्चा राष्ट्रवाद है। विभाजनकारी लोगों को रोकना और देश की अखंडता को मजबूत करना राष्ट्रवाद है। उन्होंने कहा कि हम संविधान पर केवल बोलेंगे ही नहीं, बल्कि संविधान की मूल भावना को रोज लिखेंगे, अपनी कार्यप्रणाली में परिलक्षित करेंगे। उन्होंने संविधान के माध्यम से देश-प्रदेश को आगे बढ़ाने और विकसित बनाने का संकल्प दोहराया।

 

 साभार-khaskhabar.com

 

 

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