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एमएसएमई में सरकार करती है अपने स्तर पर ये काम

आज सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग की मदद से एमएसएमई में सामाजिक-आर्थिक विकास और रोजगार के अवसर को बढ़ावा देने का कार्य संपूर्ण भारत में तेजी से हो रहा है। ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देकर विभाग ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ-साथ सामान्य ग्रामीण लोगों और विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त करने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग एमएसएमई को ऋण, प्रौद्योगिकी तथा स्थानीय एवं वैश्विक बाजार तक की पहुंच प्रदान करने का कार्य कर रहा है। एमएसएमई को न्यूनतम साझा सुविधा प्रदान करने के लिए विभाग क्लस्टरों का विकास भी करता है। इसके साथ ही निरंतर स्व-रोजगार योजनाओं के माध्यम से विभाग युवाओं को प्रोत्साहित कर रहा है, ताकि वह अपने गृह शहर एवं गांव में अपने उद्यम स्थापित कर सके।

एमएसएमई का जीडीपी में है 30 फीसदी से अधिक का योगदान 

भारत के संदर्भ में यदि इस सेक्टर को देखें तो देश की अर्थव्यवस्था, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इसका योगदान 30 फीसदी से ज्यादा है। सच है कि कोविड महामारी का पूरे एमएसएमई क्षेत्र में गंभीर प्रभाव पड़ा है, लेकिन इसके बाद भी यह जीडीपी के साथ-साथ रोजगार भी पैदा करते रहने में सफल रहा है। कहना होगा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों ने भारतीय अर्थव्यवस्था में हमेशा अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, क्योंकि इस सेक्टर में सबसे अधिक विकेंद्रीकृत रोजगार पैदा होते हैं। 

$5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लिए सरकार जीडीपी में इसके योगदान को बढ़ाना चाहती है 50 प्रतिशत 

इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन का एक आंकड़ा है कि करीब 12 करोड़ लोगों की आजीविका इस क्षेत्र पर सीधे निर्भर है। 2024 तक सरकार के $5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के मिशन को साकार करने के लिए, इस क्षेत्र का जीडीपी में योगदान बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करने की जरूरत पर बल दिया है। यही वजह है कि सरकार का फोकस इस सेक्टर की तरफ पहले से कई गुना अधिक दिखाई देता है। आज एमएसएमई कारोबारियों को केंद्र सरकार और राज्य सरकार की तरफ से कई तरह के प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। 

एमएसएमई सेक्टर में तीन लाख करोड़ रुपये तक के लोन की गारंटी देगी सरकार 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी कह चुकी हैं कि एमएसएमई सेक्टर में तीन लाख करोड़ रुपये तक के लोन की गारंटी सरकार देगी। इसके बाद से देखने में भी आ रहा है कि मध्‍य प्रदेश एवं उत्‍तर प्रदेश समेत कई राज्यों में प्रदेश सरकारें भी बहुत जिम्मेदारी के साथ एमएसएमई की मदद के लिए आगे आई हैं। 

एमएसएमई क्षेत्र की चुनौतियां

इसी तरह से एमएसएमई सेक्टर से जुड़े समीर साठे कहते हैं कि एमएसएमई पंजीकरण में हाल में आई तेजी और उनके कारोबारों में डिजिटल नवीनता का निगमन इसके लचीलेपन का एक उत्साहवर्धक संकेत है और यह महामारी के बावजूद है, लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि आंकड़ों के मुताबिक जर्मनी और चीन की जीडीपी में एमएसएमई की भागीदारी क्रमशः 55 और 60 प्रतिशत है, जो यह बताने के लिए काफी है कि भारत को इस क्षेत्र में अभी लंबा सफर तय करना है।

नारद संवाद

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