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सेहत और त्वचा दोनों के लिए लाभकारी है हल्दी पानी, स्वस्थ व मजबूत रहता है शरीर, आता है निखार

हल्दी का उपयोग हर किसी के घर में किया जाता है। हल्‍दी में एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्‍सीडेंट गुण मौजूद होते हैं। हल्‍दी का प्रयोग लगभग सभी प्रकार के खाने में किया जाता है। यह व्यंजनों के स्वाद में तो इजाफा करती ही है साथ ही इसमें अनेक औषधीय गुण भी होते हैं। यह गर्म और रूखी होती है। त्वचा, पेट और शरीर की कई बीमारियों में हल्दी का प्रयोग किया जाता है। हल्‍दी का सेवन पानी के साथ किया जाए, तो फायदे बढ़ जाते हैं। हल्‍दी का पानी सेहत और त्‍वचा दोनों के लिए लाभकारी होता है। जिन लोगों को बार-बार सर्दी-जुकाम और संक्रमण हो जाता है उन्‍हें अपनी डाइट में हल्‍दी के पानी को जरूर शामिल करना चाहिए। गुणकारी हल्‍दी के अलग-अलग लाभ उठाने के लिए आपको किसी वैद्य या विशेषज्ञ की शरण में जाने की जरूरत नहीं है। अपने घर पर ही छोटे-छोटे प्रयोग कर इसके अलग-अलग लाभ उठाए जा सकते हैं। आमतौर पर देखा गया है कि लोग उठते ही गर्म पानी या फिर निम्बू पानी का सेवन करते हैं जिससे कि उनका पेट साफ़ हो और खुल कर शरीर की गंदगी बाहर निकल जाए यह शरीर के लिए फायदेमंद है, यदि इसमें थोड़ी सी हल्दी मिक्स कर दी जाए तो इसके गुणों में भारी इजाफा हो जाता है।

हल्दी वाला पानी बनाने का तरीका

एक गिलास हल्के गुनगुने पानी में आप आधा नीबू निचोड़ कर उसमें चौथाई चम्मच हल्दी डालकर चम्मच से मिक्स कर लें। फिर उसमें आधा या पूरा एक चम्मच अपनी आवश्यकता अनुसार शहद मिला ले और इसका सेवन करे।


आइए जानते हैं हल्दी का पानी पीने के फायदे

शरीर को शक्तिशाली बनाना

लगभग 500 ग्राम की मात्रा में हल्दी की गांठे और एक किलो बुझा हुआ चूना लेकर इसको एक मिट्टी के बर्तन में डालकर इसमें ऊपर से 2 लीटर पानी डालें। पानी डालते ही चूना पकने लगता है और जब यह ठण्डा हो जाए तो बर्तन को ढककर रख दें। इसके बाद 2 महीने बाद हल्दी की गांठों को निकालकर पीसकर चूर्ण बना लें। हल्दी की गांठों के चूर्ण को 3 ग्राम की मात्रा में लेकर 10 ग्राम शहद के साथ मिलाकर लगातार 4 महीने तक रोजाना खाने से शरीर का खून साफ हो जाता है और इससे शरीर में भरपूर ताकत आती है।


वजन कम होता है

अगर आप अपना वजन कम करना चाहते हैं, तो ऐसे में अपनी डाइट में हल्‍दी का पानी शामिल कर सकते हैं। हल्‍दी में करक्यूमिन पाया जाता है। फैट बढ़ाने वाले टिशूज को बनने से रोकने के लि‍ए हल्‍दी का पानी पीना फायदेमंद होता है।

आंखों के रोग

हल्दी को अरहर की दाल में पकायें और छाया में सुखा लें उसे पानी में घिसकर, शाम होने से पहले ही दिन में दो बार जरूर लगायें इससे झामर रोग, सफेद फूली और आंखों की लालिमा में लाभ होता है।


नहीं होंगी त्‍वचा और बालों से जुड़ी समस्‍याएं


हल्‍दी का पानी खून साफ करता है। साथ ही इस पानी को पीने से शरीर में विषाक्‍त तत्‍वों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। इससे एजिंग साइन्‍स जैसे झुर्रि‍यां या मुरझाई त्‍वचा की समस्‍या दूर होगी। त्‍वचा की सूजन कम करने में हल्‍दी फायदेमंद मानी जाती है। इसका इस्‍तेमाल करने से त्‍वचा में निखार बढ़ता है।


पेट से जुड़ी समस्‍याएं दूर होंगी


हल्‍दी के पानी का सेवन करेंगे, तो पेट से जुड़ी समस्‍याएं जैसे डायरिया, अपच, कब्‍ज, पेट में दर्द, पेट में ऐंठन आदि समस्‍याएं दूर होंगी। हल्‍दी का पानी पीने से शरीर में पित्त ठीक से बनता है और पाचन तंत्र मजबूत बनता है। हल्‍दी में एंटीबैक्‍टीरियल और एंटीवायरल गुण भी होते हैं। हल्‍दी के पानी का सेवन करने से इम्‍यूनिटी मजबूत होती है। हल्‍दी में मौजूद लिपो पॉलिसैकेराइड की मदद से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले सेल्‍स बढ़ते हैं। एक गिलास गुनगुने पानी में एक नीम्बू निचोड़कर उसमें एक चुटकी हल्दी मिला लें और इसे सुबह खाली पेट पीएं। ऐसा करने से पेट में गैस बनने की समस्या दूर होती है और एसिडिटी, बदहजमी, फूड पॉइजनिंग, कब्ज आदि बीमारी से भी छुटकारा मिलता है जिससे सुबह पेट पानी की तरह साफ़ होगा।


हार्ट की बीमारियों से होगा बचाव


हल्‍दी का पानी शरीर से कोलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर को नि‍यंत्रण रखने में मदद करता है। हल्‍दी का पानी पीने से खून के थक्‍के बनने से रोकने में मदद मिलेगी। इससे आपको हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा नहीं होगा।


कम होती है सूजन

 

शरीर में सूजन कितनी भी क्यों न हो हल्दी सूजन को कम करने में सहायक है इसमें करक्यूमिन नामक एक रसायन पाया जाता है जो दवा के रूप में काम करता है इसीलिए आपने देखा होगा किसी को भी चोट लग जाती है तो हमारे बुजुर्ग हल्दी दूध में डालकर पिलाते थे।


ब्लाकेज से बचाती है हल्दी


जिन लोगो की खून की धमनियों में ब्लाकेज की शिकायत है उनको तो अवश्य ही हल्दी वाला पानी सेवन करना लाभदायक है क्योंकि हल्दी खून को जमने से रोकती है अदरक भी खून को पतला रखती है और ब्लाकेज से बचाती है।


हड्डी के टूटने पर


हड्डी के टूटने पर रोज हल्दी का सेवन करने से लाभ मिलता है। एक प्याज को पीसकर एक चम्मच हल्दी मिलाकर कपड़े में बांध लें। इसे तिल के तेल में रखकर गर्म करें और इससे फिर सेंक करें। कुछ देर सेंकने के बाद पोटली खोलकर दर्द वाले स्थान पर बांध दें।


नहीं पनपने देती बैक्टीरिया


यदि किसी कारण से शरीर के बाहरी या अंदरूनी हिस्से में चोट लग जाए-तो हल्दी वाला दूध उसे जल्द से जल्द ठीक करने में बेहद लाभदायक है क्योंकि यह अपने एंटी बैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुणों के कारण बैक्टीरिया को पनपने नहीं देता है।


त्वचा के रोग


हल्दी को पीसकर तिल के तेल में मिलाकर मालिश करें इससे चर्म रोग खत्म हो जाएगा। या अगर शरीर में खुश्की (चमड़ी सूख) गई हो तो सरसों के तेल में हल्दी को मिलाकर शरीर पर उसकी मालिश करने से लाभ होता है।


चेहरे की झांइयां


10-10 ग्राम हल्दी और तिल को पीसकर पानी में मिलाकर रात को सोते समय चेहरे पर लगाएं और सुबह गर्म पानी से धो लें। इससे चेहरा चमक उठता है।


चोट लगने पर


चोट लगने पर एक चम्मच हल्दी गर्म दूध के साथ पीने से दर्द और सूजन दूर हो जाती है। चोट लगी जगह पर हल्दी को पानी में मिलाकर उसका लेप लगाएं और अगर चोट ज्यादा गहरी हो तो उसमें हल्दी भर दें इससे चोट जल्द भर जाएगी। आंख में चोट लगने पर भी हल्दी को खाया जा सकता है। घी, आधा चम्मच सेंधानमक, थोड़ा-सा पानी मिलाकर हलुवा सा बनाकर चोट पर रखकर बांधें। आधा लीटर उबलते हुए गर्म पानी में आधा चम्मच सेंधानमक डालकर हिलाएं फिर इसमें एक चम्मच हल्दी डालें और बर्तन को उतारकर रख दें जब पानी सेक करने लायक हो जाये तो कपड़ा भिगोकर चोट वाले अंग पर इससें सेंक करें। इससे दर्द में आराम मलेगा।


चेचक


हल्दी और इमली के बीज समान मात्रा में पीसकर चुटकी भर प्रतिदिन 7 दिनों तक लेने से माता (चेचक) नहीं निकलती है। चेचक के निकलने पर इमली के बीज का चूर्ण हल्दी में मिलाकर लेने से चेचक जल्द ही ठीक हो जाता है। चेचक के दानों में अगर घाव हो जाये तो पान के कत्थे को हल्दी के संग सूखा ही छिड़के तो वह ठीक हो जायेगा।


सौन्दर्यवर्धक


पिसी हुई हल्दी, चंदन का बुरादा, पिसे हुए हरे नीम के पत्ते प्रत्येक 2-2 चम्मच में लेकर मिला लें और चेहरे पर मलें। इससे चेहरा चमक उठेगा और इस प्रयोग से चेहरे के कील मुंहासें, दाग-धब्बे दूर हो जाएंगे। कुछ हफ्ते लगातार इसे मलने से चेहरे का रंग भी साफ हो जाता है।

पायरिया हल्दी को बारीक पीसकर सरसों के तेल में मिलाकर रख लें। रोजाना रात को सोते समय इस मिश्रण को दांतों पर मलें और बिना कुल्ला किए हुए सो जाएं। सुबह उठकर कुल्ला करने से पायरिया का रोग नष्ट होता है।


मसूढ़ों का रोग


हल्दी को मोटा-मोटा कूटकर आग पर भून लें। इसे बारीक पीसकर कपड़े से छानकर प्रतिदिन सुबह-शाम मसूढ़ों पर मलें। इससे मसूढ़ों के रोग ठीक हो जाते हैं।


बवासीर (अर्श)


हल्दी और कसी हुई लौकी का चूर्ण पानी के साथ पीसकर या सरसों के तेल में पका लें। उस तेल को मदार के पत्ते में लगाकर बवासीर के मस्सों पर लगायें और लंगोट कसें। इससे मस्से सूखकर गिर जाते हैं।


श्वास, दमा रोग


हल्दी को पीसकर इसका चूर्ण बना लें और इस चूर्ण को तवे पर भूनकर शीशी में बंद करके रखें। इस चूर्ण को 5 ग्राम की मात्रा में हल्के गर्म जल के साथ प्रतिदिन सेवन करने से अस्थमा (दमा) के रोगी को बहुत लाभ मिलता है।

 

नोट: कंटेंट का उद्देश्य मात्र आपको बेहतर सलाह देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।

साभार-khaskhabar.com

 

नारद संवाद


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