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स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में सरकार की पहल से पहुंच रहा सुरक्षित जल

बच्चे देश के भविष्य होते हैं और उनका स्वस्थ होना देश के स्वस्थ भविष्य के लिए जरूरी है। कोविड महामारी ने हमें यह सिखा दिया है कि हमारे लिए अच्छा भोजन और स्वच्छ पानी कितना जरूरी है। बच्चों के लिए शुद्ध जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 29 सितंबर 2020 को प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपील की थी कि वे सभी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र तक नल के पानी का कनेक्शन पहुंचाएं और इस कार्य को प्राथमिकता दें। उस वक्त प्रधानमंत्री के विजन को साकार करने के लिए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा 2 अक्टूबर, 2020 को देश भर में बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जागरूकता और तात्कालिक भावना लाने के लिए 100 दिनों का अभियान लॉन्च किया गया था।

दस महीने से भी कम समय में 66 प्रतिशत स्कूलों में पहुंचा नल का कनेक्शन

कोविड-19 महामारी को देखते हुए स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और आश्रमशालाओं (आवासीय स्कूलों) में बच्चों की भलाई और बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ नल जल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 2 अक्टूबर, 2020 को इन संस्थानों में नल जल आपूर्ति की व्यवस्था करने के लिए एक अभियान चलाया गया था। इस अभियान के शुरू होने के बाद से दस महीने से भी कम समय में 6.85 लाख (66 प्रतिशत) स्कूलों, 6.80 लाख (60प्रतिशत) आंगनबाड़ी केंद्रों, 2.36 लाख (69 प्रतिशत) ग्राम पंचायतों तथा पूरे देश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में नल जल आपूर्ति की व्यवस्था की गई है।

बेहतर स्वास्थ्य और बेहतर स्वच्छता में देगा योगदान

कोविड-19 महामारी तथा लॉकडाउन के कारण आई बाधाओं के बावजूद आंध्र प्रदेश, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, केरल, पंजाब, सिक्किम, तमिलनाडु और केंद्र शासित अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सभी स्कूलों, आश्रमशालाओं और आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वच्छ नल जल की आपूर्ति होने लगी है। एक बार स्कूल और आश्रमशालाएं खुलने के बाद बच्चों को सुरक्षित नल का पानी उनके बेहतर स्वास्थ्य और बेहतर स्वच्छता में काफी योगदान देगा। इस अभियान के फलस्वरूप 10 महीने से भी कम समय में 6.18 लाख स्कूलों के शौचालयों में नल का पानी है और 7.52 लाख स्कूलों में नल के पानी से हाथ धोने की सुविधा है।

बच्चों को जल प्रबंधन के बारे में सीखने का मिलेगा मौका

नल जल आपूर्ति की यह व्यवस्था न केवल बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य में योगदान देती है बल्कि जल जनित रोगों को फैलने से भी रोकती है। पानी की उपलब्धता और उपयोग किए गए पानी का शोधन सुनिश्चित करने के लिए 91.9 हजार स्कूलों में वर्षा जल संचयन और 1.05 लाख स्कूलों में धूसर जल प्रबंधन प्रणाली लागू की गई है। इससे न केवल पानी की उपलब्धता बढ़ेगी बल्कि बच्चों में जागरूकता भी पैदा होगी और वे अपनी बढ़ती उम्र में जल प्रबंधन के बारे में सीखने के लिए प्रेरित होंगे। बच्चों, शिक्षकों, सहायक कर्मचारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और देखभाल करने वाले लोगों को बार-बार हाथ धोने के लिए पाइप से पीने योग्य पानी की जरूरत को स्वीकार करते हुएमिशन सभी स्कूलों, आश्रमशालाओं और आंगनबाड़ी केंद्रों में जल्द से जल्द सुरक्षित पाइप जलापूर्ति प्रदान करने पर बल दे रहा है।

अशुद्ध पानी से फैलती है कई बीमारियां

अशुद्ध पानी, खराब साफ-सफाई और स्वच्छता के कारण बच्चों को डायरिया, पेचिश, हैजा, टाइफाइड आदि जलजनित बीमारियों की संभावना बनी रहती है। बच्चों के प्रारंभिक वर्षों में अशुद्ध पानी के सेवन और खराब स्वच्छता के कारण बार-बार संक्रमण होने से स्वास्थ्य पर स्टंटिंग जैसे प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं। जिन क्षेत्रों में जल स्रोत आर्सेनिक, फ्लोराइड, भारी धातुओं आदि से दूषित होते हैं, वहां दूषित पानी के लंबे समय तक सेवन से स्वास्थ्य की गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए इस अभियान के अंतर्गत स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पीने तथा मध्याह्न भोजन पकाने, शौचालयों में हाथ धोने के लिए नल के जल की आपूर्ति की जा रही है।

ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति द्वारा किया जाएगा जलापूर्ति सुविधाओं का रखरखाव

15 अगस्त, 2019 को जल जीवन मिशन लॉन्च किए जाने के समय देश के 18.98 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से केवल 3.23 करोड़ (17 प्रतिशत) नल के पानी के कनेक्शन थे। कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के बावजूद जल जीवन मिशन ने पिछले 23 महीनों में 4.57 करोड़ नल जल कनेक्शन प्रदान किए। फलस्वरूप आज 7.80 करोड़ (41.14 प्रतिशत) घरों में नल के पानी की आपूर्ति हो रही है। गोवा, तेलंगाना, अंडमान निकोबार द्वीप समूह और पुडुचेरी ने ग्रामीण क्षेत्रों में 100 प्रतिशत घरेलू नल कनेक्शन हासिल किया है और ‘हर घर जल’ के मुकाम को हासिल कर लिया है। जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई जलापूर्ति सुविधाओं का संचालन और रखरखाव ग्राम पंचायत या इसकी उप समिति, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति या पानी समिति द्वारा किया जाएगा।

जल गुणवत्ता निगरानी के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षकों को किया जा रहा है प्रशिक्षित

इस मिशन में जल गुणवत्ता निगरानी और निगरानी गतिविधियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, जिसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, स्वयं सहायता समूह के सदस्यों, पीआरआई सदस्यों, स्कूल शिक्षकों आदि को प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) का उपयोग करके संदूषण के लिए पानी के नमूनों का परीक्षण कर सकें। जल गुणवत्ता नमूना संग्रह, परीक्षण और उपयोगकर्ताओं को परिणाम अपलोड/संचारित करने के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के साथ साझेदारी में एक ऑनलाइन पोर्टल ‘जल गुणवत्ता प्रबंधन सूचना प्रणाली’ (डब्ल्यूक्यूएमआईएस) भी बनाई गई है।

‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’

वर्तमान में 74 जिलों और लगभग 1.04 लाख गांवों में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल के पानी का कनेक्शन प्रदान किया गया हैं। इस मिशन का आदर्श वाक्य ‘कोई भी न छूटे’ है। प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के सिद्धांत का अनुसरण करते हुए गांव के हर घर में नल का कनेक्शन पहुंचाना इस मिशन का उद्देश्य है। प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले से 15 अगस्त 2019 को घोषित ‘जल जीवन मिशन 2024’ के तहत देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल जल कनेक्शन प्रदान करने के लिए राज्यों/केंद्रों के साथ साझेदारी में इस मिशन का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस पहल की सहायता से, जल्द ही देश के हर घर, हर स्कूल, हर गांव में शुद्ध और स्वच्छ जल उपलब्ध होगा।

नारद संवाद


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