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देवशयनी एकादशी गुरुवार को, भगवान विष्णु के साथ सूर्य की विशेष पूजा की परम्परा

गुरुवार, 29 जून को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसे देवशयनी एकादशी भी कहा जाता है। इस तिथि पर भगवान विष्णु के साथ सूर्य की विशेष पूजा करने की परंपरा है। देवशयनी एकादशी गुरुवार को होने से इस दिन भगवान विष्णु की पूजा से मिलने वाला शुभ फल और बढ़ जाएगा। आषाढ़ मास होने से सूर्य देव की पूजा भी खासतौर से करनी चाहिए। इस दिन व्रत-पूजा से मनोकामना पूरी होती है। आषाढ़ मास में आने वाली एकादशी पर पानी में गंगाजल और तिल मिलाकर नहाने की परंपरा है। ऐसा करने से जाने-अनजाने में हुए हर तरह के पाप और दोष खत्म हो जाते हैं। इस एकादशी पर तिल खाएं और इनका दान भी देना चाहिए। इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा के दौरान शंख से अभिषेक करने का विधान बताया गया है। साथ ही इसके बाद तुलसी पत्र चढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से महापूजा का फल मिलता है। हिंदू कैलेंडर के आषाढ़ महीने के देवता भगवान विष्णु और सूर्य हैं। इस महीने में भगवान विष्णु के वामन रूप और सूर्य की पूजा करनी चाहिए। इससे सेहत अच्छी रहती है और उम्र बढ़ती है। इस दिन क्या काम करें...
—इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर तीर्थ स्नान और उगते सूरज की पूजा करनी चाहिए।
—शालग्राम और तुलसी पूजा के साथ तुलसी के पौधे में जल चढ़ाना चाहिए।
—पीपल में भगवान विष्णु का निवास होता है। इसलिए सुबह जल्दी पीपल पूजा भी करें।
—केले के पेड़ की पूजा करें। ऐसा करने से भी भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।
—जरुरतमंद लोगों को तिल, गुड़ और गर्म कपड़ों का दान करना चाहिए।

साभार-khaskhabar.com

 

नारद संवाद


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