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बॉलीवुड में शोकः नहीं रहे के. विश्वनाथ, हिन्दी फिल्मों को दी जयाप्रदा और विजया शांति सरीखी अभिनेत्रियाँ

भारतीय सिनेमा जगत के जाने माने निर्माता, निर्देशक, लेखक व अभिनेता के. विश्वनाथ का गुरुवार देर रात निधन हो गया। वह 92 साल के थे। लंबी बीमारी के चलते उन्हें हैदराबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। उनका पार्थिव शरीर अस्पताल से जुबली हिल्स स्थित उनके निवास स्थान पर देर रात करीब 1 बजे लाया गया। अपने 71 साल लम्बे फिल्म करियर में के.विश्वनाथ ने 55 फिल्मों का निर्देशन किया, जिनमें तमिल, तेलुगु के साथ हिन्दी फिल्में भी शामिल है। विश्वनाथ को साल 2017 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह भारतीय फिल्म उद्योग का सर्वोच्च पुरस्कार है। के.विश्वनाथ दादा साहेब फाल्के पुरस्कार पाने वाले फिल्म उद्योग के 48वें व्यक्ति थे। इससे पूर्व उन्हें वर्ष 1992 में पद्यश्री सम्मान से सम्मानित किया गया था। फाल्के पुरस्कार के साथ-साथ के. विश्वनाथ ने अपने करियर में 6 नेशनल फिल्म फेयर पुरस्कार, 8 स्टेट नंदी पुरस्कार और 10 फिल्मफेयर पुरस्कार अपने नाम करने में सफलता प्राप्त की थी।

के. विश्वनाथ ने सरगम (1979), कामचोर (1982), शुभ कामना (1983), जाग उठा इंसान (1984), सुर संगम (1984), संजोग (1984), ईश्वर (1989), संगीत (1992) और धनवान (1993) जैसी हिन्दी भाषा की फिल्मों का भी निर्देशन किया है। उनकी अन्तिम हिन्दी निर्देशित फिल्म औरत औरत औरत थी। 1996 में बनी इस हिन्दी फिल्म में रेखा, राकेश रोशन, विनोद मेहरा, अरुणा ईरानी और सदाशिव अमरापुरकर के साथ डॉ. श्रीराम लागू मुख्य भूमिका में थे। दरअसल, फिल्म की शूटिंग 1979 में शुरू हुई थी, लेकिन इसमें देरी हुई और बाद में 1994 में पूरी हुई। इसे 1996 में प्रदर्शित किया गया था। फिल्म विनोद मेहरा के मरणोपरांत प्रदर्शित हुई फिल्मों में से एक थी क्योंकि फिल्म के प्रदर्शन से छह साल पहले उनकी मृत्यु हो गई थी।

के.विश्वनाथ ने हिन्दी में जितनी भी फिल्में बनाई इनमें से ज्यादातर फिल्मों में उन्होंने जयाप्रदा को नायिका के तौर पर चुना था। जयाप्रदा को हिन्दी फिल्मों में लाने वाले के.विश्वनाथ ही थे, जिन्होंने जयाप्रदा को ऋषि कपूर के साथ सरगम के जरिये दर्शकों से परिचित कराया था। जयाप्रदा के साथ बनाई गई उनकी सभी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता प्राप्त की थी। वर्ष 1989 में प्रदर्शित हुई उनकी फिल्म ईश्वर, जिसका कथा-पटकथा, निर्देशन, लेखक वे स्वयं थे, में उन्होंने अनिल कपूर के साथ हिन्दी फिल्मों में एक और नायिका विजया शांति को प्रस्तुत किया था। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ कहानी के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

के. विश्वनाथ का जन्म 19 फरवरी, 1930 को आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के रेपल्ले में हुआ था। उन्हें कला तपस्वी के नाम से भी जाना जाता था। उन्होंने हिंदू कॉलेज गुंटूर में इंटरमीडिएट की पढ़ाई की। इसके बाद आंध्र विश्वविद्यालय से साइंस में स्नातक किया। अपनी पढ़ाई खत्म करने के बाद विश्वनाथ ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत वाहिनी स्टूडियो चेन्नई में एक साउंड आर्टिस्ट के रूप में की थी।

के. विश्वनाथ ने 1951 में तेलुगु फिल्म पत्थल भैरवी में सहायक निर्देशक के रूप में काम शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने 1965 में फिल्म आत्मा गोवरवम को निर्देशित किया, जिसने स्टेट नंदी अवॉर्ड जीता। उनकी सबसे बड़ी फिल्मों में शंकरभरणम, स्वाथिनुथ्यम, सागर संगमम और स्वयंकृषि शामिल हैं। विश्वनाथ ने आखिरी फिल्म साल 2010 में आई सुभाप्रदम को निर्देशित किया था। करियर के 71 सालों में उन्होंने 55 फीचर फिल्मों में बतौर निर्देशक और 43 फिल्मों में अभिनेता के रूप में काम किया।

 

साभार-khaskhabar.com

नारद संवाद


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