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टाँगों में दिखती हैं नीली नसें तो ये हैं वैरिकोज वेन्स, इन व्यायामों से पा सकते हैं आराम

पैरों, टांगों की नसों शिराओं में वाल्‍व रहते हैं, जो रक्त को वापस ऊपर हृदय की ओर ले जाने में मदद करते है। लेकिन जब ये वॉल्‍व कमज़ोर हो जाएँ या खराब हो जाएँ तो नसों में विकृति आ जाती है जिसे वैरिकोज़ वेन्‍स कहा जाता है।

वैरिकोज़ वेंस तब होती हैं जब नसें ठीक से काम नहीं करती हैं। नसों में एक तरफा वाल्व होता है जो रक्त को पीछे की ओर बहने से रोकता है। जब ये वाल्व विफल हो जाते हैं, तो रक्त आपके हृदय की ओर बढ़ने के बजाय नसों में इकट्ठा होने लगता है। जिससे नसें बढ़ जाती हैं। वैरिकोज़ वेंस अक्सर पैरों को प्रभावित करती हैं।

वैरिकोज़ वेन्‍स रोग में रक्त ऊपर की ओर सही तरीके से नहीं चढ़ पाता और पैरों टांगों की नसों में ही रुकने लग जाता है। वेरिकोज़ वेंस, जिसे वेरिकोसाइटिस के नाम से भी जाना जाता है। यह समस्‍या तब होती है, जब नसें बढ़ जाती हैं, पतली हो जाती हैं और रक्‍त से भर जाती हैं, यानी नसें ब्‍लॉक हो जाती हैं। वेरिकोज वेंस, आमतौर पर त्‍वचा पर सूजी हुई या उभरी हुई दिखाई देती हैं। यह टेढ़ी-मेढ़ी होने के साथ ही लाल, नीली व बैंगनी रंग की होती हैं। जो काफी दर्दनाक हो सकती हैं।

कौन हो सकता है शिकार?

सबसे ज़्यादा इसके शिकार दुकानदार व महिलाएं होती हैं। कंप्यूटर के सामने और ऑफिस में घंटों बैठने, लंबे समय तक लगातार खड़े होकर काम करने वाले लोग, ट्रैफिक पुलिसकर्मी व तकनीकी प्रयोगशालाओं में कार्यरत वैज्ञानिक, न्याय पालिका के सदस्य व वकील भी इसमें शामिल हैं। यह समस्या शिक्षकों में तेज़ी से बढ़ रही है। कहने का मतलब है कि जिन लोगों ने नियमित चलने की आदत छोड़ दी है और ज़्यादा देर तक लगातार बैठने की आदत को गले लगाया है या खड़े रहते हैं, उनके पैरों में वैरिकोज़ वेन्स होना निश्चित है।

अध्ययनों के अनुमान के मुताबिक पांच वयस्कों में से एक वयस्क को वैरिकोज़ वेन्स की शिकायत होती है और वैरिकोज़ वेन्स से पीड़ित 16 प्रतिशत वयस्क 60 वर्ष या उससे ज़्यादा आयु के होते हैं। इस आयु वर्ग के 65 फीसदी लोगों में जिनमें वैरिकोज़ वेन्स का निदान किया गया है उनमें कम से कम एक पैर में वैरिकोज़ वेन्स संबंधी लक्षण पाए गए हैं।


उपचार से पहले लें सलाह

पैरों में वैरिकोज़ वेन्स की शुरुआत हो चुकी है तो वैस्कुलर सर्जन से परामर्श लें। अक्सर देखा गया है कि वैरिकोज़ वेन्स के मरीज़ कभी चर्म रोग विशेषज्ञ या कभी हड्‌डी रोग विशेषज्ञ के पास परामर्श लेने पहुंच जाते हैं। कुछ मालिश पर निर्भर रहते हैं। होश उन्हें तब आता है जब अल्सर जैसी समस्या से ग्रसित होने लगते हैं। वैरिकोज वेन्स का सही इलाज, एक अनुभवी वैस्कुलर सर्जन ही बता सकता है।

कौन सा उपचार सही है?

वैरिकोज़ वेन्स की शुरुआत होने पर, सर्जरी या लेसर की ज़रूरत नहीं पड़ती है। रोज़ सुबह व शाम एक-एक घंटे टहलें। उछल-कूद बिल्कुल न करें। पैरों को कुर्सी से एक घंटे से ज़्यादा लटकाकर नहीं बैठें और न ही लगातार खड़े रहें। वज़न नियंत्रित रखें। दिन में चलते वक़्त एक विशेष क़िस्म की क्रमित दबाव वाली जुराबों को पहनना पड़ता है। साथ ही, हर दो महीने में वैस्क्युलर सर्जन से परामर्श भी करें।

अगर वैरिकोज़ वेन्स पूरी तरह से विकसित हो गई हैं, तो उपचार में सर्जरी, लेज़र या आरएफए तकनीक का इस्तेमाल होता है। इसके बारे में चिकित्सक से परामर्श लें।

आरएफए आधुनिक तकनीक है। इसमें कोई सर्जरी नहीं करनी होती है और न ही पैरों की खाल में कोई काटा-पीटी करनी पड़ती है। मात्र चौबीस घंटे में अस्पताल से छुट्‌टी मिल जाती है। इससे उपचार के बाद, मरीज़ अगले दिन से काम पर जाना शुरू कर देता है या सामान्य जीवन जीने लगता है। यह तकनीक लेसर की तुलना में, थोड़ी बेहतर साबित हो रही है। वैरिकोज़ वेंस की समस्‍या से बचने और काफी हद तक इससे निपटने के लिए यहां कुछ एक्‍सरसाइज के बारे में बताया गया है, जिसे आप कर सकते हैं।

वॉकिंग

वॉकिंग या चलना बेहद फायदेमंद है और आमतौर पर सभी उम्र और फिटनेस स्तर के लोगों के लिए सुरक्षित है। नियमित सैर आपको वजन कम करने, स्वस्थ रक्तचाप बनाए रखने और आपकी हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद कर सकती है। साथ ही यह नसों के ब्‍लड सर्कुलेशन को विनियमित करता है।

साइकिल चलाना

साइकिल चलाना एक कम प्रभाव वाला व्यायाम है। यह आपके जोड़ों की रक्षा करते हुए भी परिसंचरण को बढ़ा सकता है। नियमित रूप से साइकिल चलाना आपके कॉफ (घुटनों के नीचे के पीछे का हिस्‍सा) मांसपेशियों को मजबूत कर सकता है और स्वस्थ रक्त प्रवाह को बढ़ावा देता है। आप चाहें तो पारंपरिक तौर पर साइकिल चला सकते हैं। इसके अलावा बिना साइकिल के साइकिल एक्‍सरसाइज कर सकते हैं। इसे करने के लिए आप अपनी पीठ के बल लेटकर, अपने घुटनों को अपनी छाती की ओर खींचकर, और अपने पैरों से एक पेडलिंग गति बनाकर अपने पैरों की मांसपेशियों को फैला सकते हैं।

लंजेज

आपके पैरों और कॉफ में कई अलग-अलग मांसपेशी समूहों का काम करते हैं। जब ये मांसपेशियां मजबूत और स्वस्थ होती हैं, तो वे रक्त को सही दिशा में बहने में मदद कर सकती हैं। अपने पैरों के साथ थोड़ा अलग खड़े होकर शुरू करें। आगे बढ़ें और अपने घुटने मोड़ें। अपने घुटने को सीधे अपने टखने से ऊपर रखना सुनिश्चित करें। कुछ सेकंड के लिए खुद को बैठने की मुद्रा में रखें, फिर खड़े हो जाएं।

 

नोट: आलेख में दी गई जानकारी मान्यताओं पर आधारित है। आप अपने लिए विषय विशेषज्ञों से परामर्श कर सकते हैं। कंटेंट का उद्देश्य मात्र आपको बेहतर सलाह देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।


साभार-khaskhabar.com

 

नारद संवाद


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