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MATHURA : पुरानी मशीन से लिये गये एक्सरे स्पष्ट दिखाई नहीं देते

मथुरा(सतपाल सिंह)। जिला चिकित्सालय में आंदाजे से एक्सरे रिपोर्ट तैयार की जा रही है। यह खुद सीएमएस  आरएस मौर्या ने स्वीकार किया है कि जिला चिकित्सालय में जो एक्सरे मशीन लगी है वह 33 साल पुरानी है, जिसमें एक्सरे स्पष्ट दिखाई नहीं देते हैं। यह एक्सरे मशीन 1985-86 माडल  की है। एक्रे के लिए चिकित्सालय में काफी मरीज आते हैं। वृंदावन में भी बडा हास्पीटल है लेकिन मेडिकोलीगल और दूसरे मामले यहीं आते हैं। ज्यादातर मरीज भी यहीं पहुंचते हैं। हालात यह है कि लम्बे समय से चिकित्सालय में फिजीशियन ही नहीं है। यहां फिजीशियन के दो पद स्वीकृत हैं जो दोनों ही रिक्त चल रहे हैं। तीन के सापेक्ष दो सर्जन तैनात हैं जिनमें से एक अनुपस्थित चल रहे हैं। अधीक्षक औषधी भण्डार का पद भी खाली चल रहा है। नेत्र सर्जन के दो पद हैं जिनमें से एक चिकित्सक की तैनाती है एक चिकित्सक का पद खाली चल रहा है। ब्लड बैंक में भी यही स्थिति है। आकस्मिक चिकित्साधिकारी के तीन पद हैं जिनमें से एक पद रिक्त चल रहा है जबकि तैनात दो ईएमओ में से एक निलंबित चल रहे हैं। यह हालात तब हैं जब सांसद हेमा मालिनी से लेकर महानिदेशक तक चिकित्सालय का दौरा कर चुके हैं। सांसद हेमा मालिनी ने भी निर्देश तो बहुत दिये थे लेकिन एक एक्सरे मशीन तक उपलब्ध नहीं करा सकीं। अब उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने भी औचक निरीक्षण कर निर्देशों की झडी लगा दी। जिसके बाद सीएमसएस मौर्या का दर्द छलग उठा।्रदेश के उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बुधवार को जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया था। उन्होंने इस दौरान सीएमएस डा. आरएस मौर्या को कई दिशा निर्देश भी दिये। खास कर पाने के पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाये, लावारिस मरीजांे के वार्ड, एक्सरे विभाग का भी निरीक्षण किया। जनरल वार्ड का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देष दिये।


उर्जा मत्री के उटपटांग निर्देशों पर सीएमएस के तकनीकी जबाव
श्रीकांत शर्माः ये पानी हम नहीं पी सकते तो मरीज कैसे पीएंगे
सीएमएसः अस्पताल में दो आरओ लगे हैं। दोनों आरओ का टीडीएस टेस्ट कराया गया। एक का टीडीएस 55 दूसरे का 65 पाया गया है। मेरे हिसाब से यह ठीक है। आरओ का पानी पीने योग्य है।

श्रीकांत शर्माः लावारिस वार्ड के मरीजों को जनरल वार्ड में शिफ्ट किया जाए
सीएमएसः लावारिस मरीजों को अलग से बरामदे में बने वार्ड में बने वार्ड मंे रखा जाता है। ये व्यवस्था लम्बे समय से है। इनमें से कई मरीज ड्रग एडिक्ट हैं। ड्रग्स नहीं मिलने पर चीखते चिल्लाते हैं। कुछ बैड पर ही शौच कर जाते हैं। साफ सफाई रखने के बाद भी स्मैल रह जाती है। अगर इन्हें जनरल वर्ड में शिफ्ट किया जाएगा तो वहां दूसरे मरीज नहीं रह पाएंगे।

श्रीकांत शर्माः रात को आये मरीज एक्सरे सुबह कैसे हुआ
सीएमएसः रात को करीब आठ बजे मरीज आया। सुबह एक्सरे करने के बाद प्लास्टर भी चढा दिया गया। 35 साल पुरानी एक्सरे मशीन है। एक्सरे टैक्निीशियन, रेडियोलोजिस्ट, कार्डियोलाजिस्ट नहीं हैं। एक एक्रेटेक्निीशियन के से राउण्ड दा क्लाक ड्यूटी ले पाना संभव नहीं है। कई बार महीने में ये 10 से 12 दिन की छुट्टी पर चले जाते है। इससे वर्क लोड बढता है।

 


संपादकीय

विशाल अग्रवाल ने बताया कि चालान सिर्फ ट्रफिक पुलिस काटे सभी पुलिस कर्मियों को इसकी जिम्मेदारी न दी जाये तो 50 प्रतिशत तक सही तरीके से काम हो पायेगा। जबकि आकाशवाणी के पूर्व उद्घोषक श्रीकृष्ण शरद, राकेश रावत एडवोकेट, पी0 के0 वार्ष्णेय, अरविन्द चौधरी, जगन्नाथ पौद्दार, पवन शर्मा, महेन्द्र राजपूत, जितेन्द्र गर्ग, सपन साहा, प्रताप विश्वास इन सभी ने माना कि इसमें पुलिस का फायदा अधिक होगा।  

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