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दिल्ली(ब्यूरो)। आरएसएस ब्रजप्रान्त के पदाधिकारी और अधिवक्ता के के पाठक एडo के साथ रोहिणी सैo-16 में हुई लूट से अधिवक्ताओं में रोष, आरोप है लुटेरों का पता ठिकाना बताये जाने के बाद भी पुलिस नही कर रही कार्यवाही. || {खबरों और विज्ञापन के लिए सम्पर्क करें - 9897425393, 9997047999, 9358312009, 9897134003, 9634482844} || मीडियाभारती वेब सॉल्युशन अपने उपभोक्ताओं को कई तरह की इंटरनेट और मोबाइल मूल्य आधारित सेवाएं मुहैया कराता है। इनमें वेबसाइट डिजायनिंग, डेवलपिंग, वीपीएस, साझा होस्टिंग, डोमेन बुकिंग, बिजनेस मेल, दैनिक वेबसाइट अपडेशन, डेटा हैंडलिंग, वेब मार्केटिंग, वेब प्रमोशन तथा दूसरे मीडिया प्रकाशकों के लिए नियमित प्रकाशन सामग्री मुहैया कराना प्रमुख है- संपर्क करें - 0129-6526474, 09997047999 || अगर आप भी चाहते है अपने मोबाइल पर ख़बरें तो आज ही SMS Alert करायें संपर्क करें - 9997047999, 9897425393

MATHURA : यह नाम नहीं आ रहा रास

मथुरा। नाम में दम चाहिए, जब नाम में दम होता है तो जनता भी डरती है और रौब भी गालिब होता है। यही वजह है कि विभिन्न संगठनों की मांगों पर सरकार समय समय पर कर्मचारियों के पदनामों को बदलती रही है जैसे लेखपालों का परिवेक्षण करने वाले अधिकारी का नाम कई बार बदला गया। पूर्व प्रचलित नाम गिरदावर कानूनगो था। इसे बदल कर सुपरवाइजर कानून गो कर दिया गया। बाद में सुपरवाइजर कानूनगो से बदलकर भू लेख निरीक्षक और वर्तमान में राजस्व निरीक्षक कर दिया गया। जबकि बेचारे लेखपाल साठ साल से लेखपाल ही बने हुए हैं। इसी प्रकार ग्राम सेवक से ग्राम विकास अधिकारी, पंचायत सचिव से ग्राम पंचायत अधिकारी, कनिष्ठ लिपिक से कनिष्ठ सहायक, नलकूप चालक से नलकूप प्रभारी, चैकीदार से ग्राम प्रहरी आदि नाम परिवर्तित किये गये हैं लेकिन इस बीच किसी ने लेखपालों की सुध नहीं ली। यह बात अब लेखपालों को खलने लगी है और अब वह अपने लिए भी कोई रौबीला सा नाम चाहते हैं, जिसकी कुछ धमक बने। हालांकि ऐसा नहीं है कि लेखलापों ने इससे पहले ये प्रयास नहीं किया लेकिन प्रयास रंग नहीं लाया। तीन मई 2016 को हुई राजस्व परिषद की बैठक में तथा 31 अक्टूबर 2017 में लिये गये निर्णय के अनुशार लेखपाल का पदनाम राजस्व उपनिरीक्षक किये जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। अपर मुख्य सचिव राजस्व ने 9 जुलाई 2019 हुई बैठक में लेखपाल का नाम परिवर्तित किये जाने पर सैद्धांतिक सहमति भी बनी थी। जिस पर कार्मिक विभाग से अनापत्ति भी प्राप्त हो चुकी है। इसके बावजूद शासन से कोई शासनादेष अभी तक पारित नहीं हुआ है।
मंगलवार को प्रदेशव्यापी आव्हान पर लेखलानों ने सभी तहसील मुख्यालयों पर प्रदर्षन किया। इस दौरान उनकी दर्जन भर मांगे थीं जो लम्बे समय से चली आ रही थीं। इन मांगों में लेखलान पदनाम परिवर्तन किये जाने को लेकर भी लेखपालों के अंदर खासी बेचैनी देखी गई। आंदोलित लेखपालों को उम्मीद यही है कि उन्हें भी जल्द ही दमदार और रौबीला नाम मिल जाएगा।

 


संपादकीय

विशाल अग्रवाल ने बताया कि चालान सिर्फ ट्रफिक पुलिस काटे सभी पुलिस कर्मियों को इसकी जिम्मेदारी न दी जाये तो 50 प्रतिशत तक सही तरीके से काम हो पायेगा। जबकि आकाशवाणी के पूर्व उद्घोषक श्रीकृष्ण शरद, राकेश रावत एडवोकेट, पी0 के0 वार्ष्णेय, अरविन्द चौधरी, जगन्नाथ पौद्दार, पवन शर्मा, महेन्द्र राजपूत, जितेन्द्र गर्ग, सपन साहा, प्रताप विश्वास इन सभी ने माना कि इसमें पुलिस का फायदा अधिक होगा।  

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तीसरी आंख

जयपुर। जवाहर सर्किल थाना इलाके में कैफे की आड में चल रहे हुक्का-बार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने वहां से कई हुक्के, चिलम, पाइप, कटौरी व कई फ्लेवर जब्त किया है।  

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Bollywood

दर्शन