Editor's Picks

Owl Image
Owl Image
Owl Image
Owl Image
Owl Image
Owl Image
Owl Image
Owl Image
Owl Image
Owl Image

BREAKING NEWS

जयपुर : गहलोत-पायलट की लड़ाई में अटकी राजनीतिक नियुक्तियां, अब करना होगा लंबा इंतजार || बिहार में बाढ़ से 21 लोगों की मौत, 69 लाख की आबादी प्रभावित || कोरोना : पंडा पुजारी मांग कर रहे है मुआवजे की || MATHURA : पुलिस बोली डिप्रेशन में था इंजीनियर, कानपुर से किया बरामद

MATHURA : मधुमक्खी पालन करें किसान

मथुरा। मधुमक्खीपालन पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन सरसों उत्पादक किसानों के लिए मधुमक्खीपालन करना एक वरदान हैं। सरसो की फसल में अधिक समय तक फूल बने रहते हैं इसलिए मधुमक्खीपालन इस फसल के साथ करने से षहद का अधिक उत्पादन होगा और लाभ भी अधिक मिलेगा। साथ ही मधुमक्खियों द्वारा परागण से सरसों उत्पादन में भी बढोत्तरी होगी। इससे किसान अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकते हंै। यह संदेष सरसों अनुसंधान निदेशालय के निदेशक डॉ. पीके राय ने मधुमक्खीपालन पर तीन से सात दिसम्बर तक आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रतिभागियों को दिया। उन्होनें कहा कि मधुमक्खीपालन की शुरूआत करने से पहले इसके बारे में पूर्ण प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहिए।
मधुमक्खियों का जीवन चक्र, व्यवहार, खान पान इत्यादि का गहराई से अध्ययन करके ही मधुमक्खीपालन को लाभदायक बनाया जा सकता है। उन्नत तकनीकों को खेतों में अपनाकर कृषि के उत्पादन को बढाया जा सकता है। सरसों का उत्पादन ब-सजयाने में उन्नत किस्मों के चयन के साथ-साथ समय पर सही शस्य क्रियाओं को करने का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। वर्तमान में कृषि जोत एवं संसाधन लगातार घटते जा रहे हैं और किसानो के सामने आय के
विकल्प सीमित हो रहे है। इसलिए किसानों को अपनी आमदनी बढाने के लिए कृषि आधारित वैकल्पिक व्यवसाय अपनाने होगें तभी खेती लाभदायक होगी।
इस अवसर पर प्रधान वैज्ञानिक डा.अशोक शर्मा ने कहा कि वैज्ञानिक खेती की अनुशंसित तकनीको को अच्छी तरह समझ कर उनका उपयोग करना चाहिए। किसानों को सरसों की खेती वैज्ञानिक तरीके से करके अपना उत्पादन बढाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शस्य फसलों के साथ साथ बागवानी, उद्यानकी एवं
पशुपालन को भी अपनायें ताकि अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो जिससे खेती की जोखिम कम होगी। विकसित वैज्ञानिक किस्मों एवं तकनीको को किसानो तक पहुंचाना पहली प्राथमिकता है। मधुमक्खीपालन छोटे कृषक एवं भूमिहीन लोग भी कर सकते हैं क्योकि इसके लिए कोई क्षेत्र विशेष की आवश्यक्ता नहीं होती है। उन्होंने कहा कि मधुमक्खीपालन को किसानों या युवाओं को समूह बनाकर करना चाहिये ताकि इसके प्रबंधन में आसानी हो।
प्रशिक्षण में किसानों को मधुमक्खी पालन का इतिहास, विकास, प्रारम्भ एवं प्रबन्धन मधुमक्खी का सामाजिक जीवन चक्र, पहचान एवं जीवन इतिहास मधुमक्खी पालन हेतु आवश्यक सामान मधुमक्खियों द्वारा परागीकरणः मकरंद एवं पराग स्त्रोत मधुमक्खी के रोग एवं शत्रु कीट दैनिक
जीवन में शहद की उपयोगिता एवं व्यावसायिक मधुमक्खी पालन रानी मक्खी का पालन मधुमक्खी के मोम एवं की उपयोगिता एवं मधुमक्खियों पर कीटनाशी रसायनों का कुप्रभाव मधुमक्खी पालन रूची समूह का गठन, मधुमक्खी पालको के लिए योजनाएं राई, सरसों उत्पादन बढाने की रणनीति राई सरसो उत्पादन की उन्नत शस्य क्रियायें आदि विषयों पर विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित किया गया। आत्मा परियोजना के अर्न्तगत सरसों अनुसंधान निदेशालय द्वारा यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘‘मधुमक्खी पालन एवं सरसों की वैज्ञानिक खेती‘‘ पर आयोजित किया गया था। डा.अशोक कुमार शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का संपूर्ण संचालन किया।

 


कोरोना विशेष

मथुरा। मुड़िया मेला, हरियाली तीज, रक्षाबंधन के बाद अब श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कोरोना का ग्रहण लग गया है। राधाष्टमी, बल्देव छठ जैसे ब्रज के आंचलिक आयोजन भी बिना भीडभाड के होंगे। मंदिरों पर भीड नहीं है।  

Read More

हमारी बात

मथुरा। देशभक्ति के कितने ही स्वरूप हो सकते हैं। कोरोना संकट ने ये साबित कर दिया कि देशभक्ति दिखने के लिए आप के आपके पास किसी भी जगह मौका है। एक नौजवान चिकित्सक ने कोरोना के मरीजों के इलाज में अपनी पूरी ताकत झौंक दी है।  

Read More

Bollywood

दर्शन