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ADR का आय-व्यय का विश्लेषण : BJP की आय 6 राष्ट्रीय दलों की दो-तिहाई, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

नई दिल्ली। केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वित्त वर्ष 2018-19 में सभी राजनीतिक दलों में सबसे आगे रहते हुए 2410.08 करोड़ रुपए की आय हासिल की। यह आय अन्य छह राष्ट्रीय दलों की कुल आय का 65.16 प्रतिशत है। एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स (एडीआर) के वित्त वर्ष 2018-19 के लिए राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के आय-व्यय के विश्लेषण के अनुसार, भाजपा ने कुल 2410.08 करोड़ रुपए की आय करने और कुल आय का सिर्फ 41.71 प्रतिशत (1005.33 करोड़ रुपए) व्यय करने की घोषणा की।

वहीं कांग्रेस की कुल आय 918.03 करोड़ रुपए रही और उसने 51.19 प्रतिशत (469.92 करोड़ रुपए) खर्च किए। छह राष्ट्रीय दलों (भाजपा, कांग्रेस, माकपा, बसपा, तृणमूल कांग्रेस और भाकपा) ने देशभर से कुल 3698.66 करोड़ रुपए की आय की घोणषा की। एडीआर के विश्लेषण के अनुसार भाजपा की आय वित्त वर्ष 2017-18 में 1027.34 करोड़ रुपए से वित्त वर्ष 2018-19 में 134.59 प्रतिशत बढक़र 2410.08 करोड़ हो गई।

भाजपा ने वित्त वर्ष 2018-19 में अपनी कुल आय का 97.67 प्रतिशत (2354.02 करोड़ रुपए) स्वैच्छिक योगदान के रूप में घोषित किया। वहीं कांग्रेस ने इस दौरान सबसे ज्यादा 551.55 करोड़ रुपए (कुल आय का 60.08 प्रतिशत) अनुदान, दान, योगदान के रूप में लेने की घोषणा की। भाजपा का सबसे ज्यादा 792.39 करोड़ रुपए का खर्च चुनाव, प्रचार में हुआ, जिसके बाद प्रशासनिक कार्यो में 178.35 करोड़ रुपए खर्च हुए।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट समय पर दाखिल की, वहीं भाजपा ने 24 दिन बाद और कांग्रेस व भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने 42 दिन बाद जमा की। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट अंतिम तिथि के 76 दिन बाद जमा की। टीएमसी की कुल आय 192.65 करोड़ रुपए हुई, जिसमें पार्टी ने 5.97 प्रतिशत (11.50 करोड़ रुपए) खर्च किए, माकपा ने 100.96 करोड़ रुपए की आय की घोषणा की और उसने 76.15 करोड़ रुपए खर्च किए। कांग्रेस की आय वित्त वर्ष 2017-18 में 199.15 करोड़ रुपए से 360.97 प्रतिशत (718.88 करोड़ रुपए) बढक़र वित्त वर्ष 2018-19 में 918.03 करोड़ रुपए हो गई। वित्त वर्ष 2017-18 से 2018-19 के बीच सबसे ज्यादा आय वृद्धि 3,628.47 प्रतिशत (187.48 करोड़ रुपए) टीएमसी की हुई और उसने 2017-18 में 5.167 करोड़ रुपए की आय से बढक़र 2018-19 में 192.65 करोड़ रुपए हो गई। एडीआर विश्लेषण के अनुसार राष्ट्रीय दलों ने दान, योगदान को अपनी आय के तीन प्रमुख साधनों में गिनाया।

दान और योगदान से राजनीतिक दलों- भाजपा को 2354.02 करोड़ रुपए, कांग्रेस को 551.55 करोड़ रुपए, टीएमसी को 141.54 करोड़ रुपए, माकपा को 37.228 करोड़ रुपए और भाकपा को 4.08 करोड़ रुपए की आय हुई। एडीआर के अनुसार, कुछ राष्ट्रीय दलों ने इलेक्टोरल बॉन्ड्स स्कीम, 2018 पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए इसकी आलोचना की है। उन्होंने हर सार्वजनिक मंच पर इसकी हरसंभव आलोचना की है और एक राष्ट्रीय पार्टी ने तो इसके खिलाफ जनहित याचिका तक दायर कर दी है।

हालांकि अजीब बात है कि वही दल इलेक्टोरल बॉन्ड्स के माध्यम से चंदा स्वीकार कर रहे हैं। दानदाताओं को गोपनीयता प्रदान करते हुए इलेक्टोरल बॉन्ड्स वित्त वर्ष 2018-19 में राष्ट्रीय दलों को चंदा देने में सबसे लोकप्रिय माध्यम के रूप में उभरा है। वित्त वर्ष 2018-19 में छह राष्ट्रीय दलों की 1931.43 करोड़ रुपए (52 प्रतिशत से अधिक) इलेक्टोरल बॉन्ड्स से हुई है।


 साभार-khaskhabar.com

 

 


संपादकीय

विशाल अग्रवाल ने बताया कि चालान सिर्फ ट्रफिक पुलिस काटे सभी पुलिस कर्मियों को इसकी जिम्मेदारी न दी जाये तो 50 प्रतिशत तक सही तरीके से काम हो पायेगा। जबकि आकाशवाणी के पूर्व उद्घोषक श्रीकृष्ण शरद, राकेश रावत एडवोकेट, पी0 के0 वार्ष्णेय, अरविन्द चौधरी, जगन्नाथ पौद्दार, पवन शर्मा, महेन्द्र राजपूत, जितेन्द्र गर्ग, सपन साहा, प्रताप विश्वास इन सभी ने माना कि इसमें पुलिस का फायदा अधिक होगा।  

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