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राज्यसभा : जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक बिल पास, अब कांग्रेस अध्यक्ष नहीं होंगे ट्रस्टी

नई दिल्ली। मंगलवार को राज्यसभा में लंबी चर्चा के बाद जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक (संशोधन) विधेयक ध्वनिमत के साथ पारित कर दिया गया। इसे कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इसके पीछे वजह ये है कि इस बिल में जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक के न्यासी (ट्रस्टी) के रूप में कांग्रेस अध्यक्ष को हटाए जाने का प्रावधान किया गया है। निचले सदन लोकसभा में यह विधेयक पिछले सत्र में ही पारित हो चुका है।

इस विधेयक के हिसाब से न्यासी के रूप में कांग्रेस अध्यक्ष को हटाकर लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष को रखने का प्रावधान किया गया है। अगर नेता प्रतिपक्ष नहीं है तो सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता को न्यासी बनाया जाएगा। राज्यसभा ने भोजनावकाश के बाद लगभग तीन घंटे की बहस के बाद इस विधेयक को पास कर दिया।

राज्यसभा में यह विधेयक सात अगस्त को पेश किया गया था। विधेयक में कांग्रेस के सुब्बीरामी रेड्डी ने एक संशोधन पेश किया था जिसे उन्होंने वापस ले लिया। बिल पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि जलियांवाला बाग में हजारों लोगों ने कुर्बानी दी। भविष्य में ऐसा कभी नहीं कहा जाना चाहिए कि हमने खून की एक भी बूंद बहाए बिना आजादी हासिल की। पर्यटन एवं संस्कृति प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि सरकार स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सभी शहीदों को सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है और यह विधेयक इसी दिशा में एक कदम है। जलियांवाला बाग न्यास की स्थापना 1921 में की गई थी और इसमें जनता ने धन दिया था। वर्ष 1951 में नए न्यास का गठन कर इसमें व्यक्ति विशेष को सदस्य बनाया गया और किसी संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को इसमें शामिल नहीं किया गया। न्यास में शहीदों के परिजनों को भी शामिल किया जाएगा। मौजूदा न्यास का कार्यकाल 2023 में समाप्त होगा।

कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि 13 अप्रैल 1919 को हुअ इस जघन्य हत्याकांड के बाद कांग्रेस की पहल पर जलियांवाला बाग ट्रस्ट का गठन किया गया था। इस स्थल से हमारा भावनात्मक रिश्ता है, सरकार को बड़ा दिल दिखाते हुए इस ट्रस्ट से कांग्रेस अध्यक्ष को नहीं हटाना चाहिए। ट्रस्ट से किसी न्यासी को हटाने का अधिकार सरकार को देने का प्रावधान भी उचित नहीं है।
 साभार-khaskhabar.com