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मथुरा(सतपाल सिंह) : सीएम योगी के आदेश के बाद भी नाकाफी हैं व्यवस्थाएं. NH2 पर हजारों की संख्या में बीवी-बच्चों सहित भूखे-प्यासे, मीलों पैदल चलने को मजबूर हैं दिल्ली, NCR से आने वाले कामगार। पैदल चल रहे मजदूरों को नहीं मिल रहा है कोई सहारा। मथुरा प्रशासन कर रहा है बसों की व्यवस्था करने का दावा

रहस्यमय गुमनामी बाबा नहीं थे सुभाष चंद्र बोस, यूपी विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट

लखनऊ। रहस्यमयी गुमनामी बाबा नेताजी सुभाष चंद्र बोस नहीं थे। यह खुलासा एक रिपोर्ट में किया गया है। गुमनामी बाबा के अनुयायी उन्हें नेताजी मानते थे। मामले की जांच करने वाले न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) विष्णु सहाय आयोग की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। लोगों ने दशकों तक यह दावा किया कि गुमनामी बाबा वास्तव में अपनी पहचान छिपाकर रह रहे नेताजी सुभाष चंद्र बोस हैं। पिछले सप्ताह विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट में आयोग ने लिखा कि गुमनामी बाबा नेताजी के अनुयायी थे और उनकी आवाज नेताजी की तरह थी।

गुमनामी बाबा का निधन 16 सितंबर 1985 हो गया था और उनका अंतिम संस्कार 18 सितंबर 1985 को अयोध्या स्थित गुप्तार घाट पर किया गया। रिपोर्ट में कहा गया, फैजाबाद (अयोध्या) स्थित राम भवन से चार चीजें बरामद हुईं, जहां गुमनामी बाबा उर्फ भगवानजी अंतिम समय तक निवास करते रहे, जिनसे यह पता नहीं लगाया जा सकता कि गुमनामी बाबा ही सुभाष चंद्र बोस थे। कुल 130 पेज की रिपोर्ट में 11 बिंदु बताए गए हैं, जिनमें गुमनामी बाबा के नेताजी का अनुयायी होने के संकेत मिलते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, वे (गुमनामी बाबा) नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अनुयायी थे। लेकिन जब लोग उन्हें नेताजी सुभाष चंद्र बोस बुलाने लगे तो उन्होंने अपना आवास बदल दिया। आयोग ने कहा कि वे संगीत, सिगार और खाने के शौकीन थे और उनकी आवाज नेताजी की आवाज जैसी थी जो कमांड का एहसास कराती थी। आयोग ने कहा कि वे बंगाली थे और वे बंगाली, अंग्रेजी और हिंदी अच्छे से बोलते थे तथा उन्हें युद्ध और समकालीन राजनीति की अच्छी जानकारी थी लेकिन उन्हें भारत में शासन की स्थिति में रुचि नहीं थी।

आयोग की रिपोर्ट में न्यायमूर्ति सहाय ने कहा कि 22 जून 2017 को फैजाबाद जिला अधिकारी के कार्यालय स्थित जिला ट्रेजरी में मौजूद दस्तावेजों का निरीक्षण करने पर उन्हें ऐसे सबूत मिले, जिनसे गुमनामी बाबा को नेताजी बताने वाले दावे पूरी तरह नष्ट हो गए। सहाय ने कहा कि उसमें किसी बुलबुल द्वारा कोलकाता से 16 अक्टूबर 1980 को लिखा गया एक पत्र मिला, जिसमें लिखा था, आप मेरे यहां कब आएंगे? हम बहुत खुश होंगे अगर आप नेताजी की जयंती पर यहां आएं। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि गुमनामी बाबा नेताजी नहीं थे। आयोग ने कई अन्य महत्चपूर्ण खोज भी कीं। रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत इच्छाशक्ति और अनुशासन के कारण गुमनामी बाबा को छिपकर रहने की शक्ति मिली।

आयोग ने कहा कि उन्होंने पूजा और योग के लिए पर्याप्त समय दे रखा था और पर्दे के पार से उनसे बात करने वाले लोग मंत्रमुग्ध हो जाते थे। आयोग ने कहा कि वे प्रतिभावान व्यक्ति थे और एक व्यक्ति के तौर पर उनमें एक खासियत थी कि वे अपनी गोपनीयता भंग होने से बेहतर मरना पसंद करते। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के प्रावधान के अंतर्गत, उनके पास अपना जीवन अपनी इच्छा से जीने की पसंद और अधिकार था।

इस अधिकार में ही उनके गोपनीयता का अधिकार प्रतिष्ठापित था। आयोग ने अपनी बात सिद्ध करने के लिए यह तर्क भी दिए कि गुमनामी बाबा नेताजी हो सकते थे, लेकिन यह कहने के लिए वे नहीं हैं। आयोग ने कहा, यह शर्मनाक है कि उनका अंतिम संस्कार ऐसे हुआ कि उसमें सिर्फ 13 लोग शामिल हो सके। उन्हें इससे बेहतर बिदाई दी जानी चाहिए थी।

न्यायमूर्ति सहाय जांच आयोग को जांच आयोग कानून 1952 के अंतर्गत 28 जून 2016 को गठित किया गया था। आयोग ने अपनी रिपोर्ट 19 सितंबर 2017 को सौंपी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए 31 जनवरी 2013 को आयोग गठित करने का आदेश दिया था।

 

 साभार-khaskhabar.com

 


कोरोना विशेष

दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, से आये हुए ये सभी लोग झाँसी, कानपुर, एटा, फिरोजाबाद, इटावा, सवाई माधोपुर इनमे से राजेश से बात हुयी उसने बताया की मजदूरी का काम करते है मालिक ने काम बंद कर दिया ठेकेदार ने पैसे नहीं दिए इसलिए घर की तरफ निकल लिए...... वैसे इन्हे कही कही ट्रकों और खुली गाडियों ने भी ले जाया जा रहा है...... ऐसे ही सैकड़ो लोगों ने अपनी अलग अलग बात कही.. मथुरा की जनता का आभार जताया की हर थोड़ी दूरी पर लोग खाना दे रहे है। ... वही सरकार से गुहार लगायी की हमे हमारे घरो तक पहुँचाये क्योकि हमारे साथ महिलाएं व बच्चे है।  

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तीसरी आंख

जयपुर । जयपुर शहर के अलग-अलग थाना इलाके से पिछले पन्द्रह माह में सौ से अधिक भैंस चुराने वाली अंतरराज्यीय मोजम मेव गिरोह के तीन बदमाशों को डीएसटी साउथ और मुहाना थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की दो भैंस व वारदात में प्रयुक्त वाहन व औजार बरामद किए है। पुलिस गिरोह के पकड़े बदमाशों से पूछताछ कर अन्य बदमाशों की तलाश कर रही है। डीसीपी (साउथ) योगेश दाधीच ने बताया कि मोजम मेव गिरोह के बदमाश हफिज (32) निवासी बिछोर नुहु मेवात हरियाणा, समयद्दीन (35) निवासी गांव निमला कैथवाडा भरतपुर और आजाद उर्फ टौंटा (34) निवासी सीकर भरतपुर को गिरफ्तार किया है। बदमाश हफिज गुलाब बिहार केसर चौराहा मुहाना में किराए से रहता है और पिछले आठ वर्षो से मुहाना मंडी में लोडिंग टैंपो चला रहा था। वह बाइक से दिन में रैकी करता उसके बाद अपने साथियों को वारदात के लिए भरतपुर से बुलाता। हफिज अपने टैंपो में भैंसों को भरकर भरतपुर ले जाता था। यह गैंग चुराकर लाई गई भैंसों को अपने गांव के आस-पास के लोगों को या कोशी, गोवर्धन और मथुरा पशु हटवाड़ा में बेच देते थे। घटना के वक्त मोबाइल बदल-बदलकर काम में लेते है। वारदातों में शामिल गैंग के सरगना व अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे है। गिरोह के कब्जे से लोडिंग टैपों, दीवार व तारबंदी काटने के औजार सहित प्लास्टिक की रस्सियां जब्त की गई है। गिरोह ने 15 माह से मुहाना, सांगानेर सदर, शिवदासपुरा, बगरू, प्रतापनगर, चाकसू सहित ग्रामीण इलाके के चंदवाजी और शाहपुरा इलाके से तीन दर्जन से ज्यादा वारदात कर 100 से ज्यादा भैंस चुराई है।  साभार-khaskhabar.com

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