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महाराष्ट्र के हालात पर ट्वीट करना पड़ा भारी! IAS अशोक खेमका का 53वीं दफा ट्रांसफर

चंडीगढ़। हरियाणा के आईएएस ऑफिसर अशोक खेमका को एक बार फिर ट्रांसफर का सामना करना पड़ा है। खास बात ये है कि उनका 53वीं दफा तबादला हुआ है। इस बार 8 माह बाद उनका ट्रांसफर किया गया। उन्हें अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग में भेजा गया है। कहा जा रहा है कि खेमका को महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक उठापटक को लेकर किए गए कमेंट का खमियाजा भुगतना पड़ा है।

खेमका ने आज सुबह ही ट्विटर पर लिखा था कि विधायकों की खरीद-फरोख्त, उन्हें बंधक बनाना सभी जनसेवा के लिए की जाती है। जनसेवा जैसा सुअवसर छोड़ा नहीं जाता, वंचित रहने से हृदय में पीड़ा जो होती है। होने दो, खूब द्वंद होने दो, साझेदारी में तो मिल-बांट कर जनसेवा की जाएगी।

ट्रांसफर के बाद उन्होंने दोपहर में ट्वीट किया कि फिर तबादला। लौट कर फिर वहीं। कल संविधान दिवस मनाया गया। आज सर्वोच्च न्यायालय के आदेश एवं नियमों को एक बार और तोड़ा गया। कुछ प्रसन्न होंगे। अंतिम ठिकाने जो लगा। ईमानदारी का ईनाम जलालत। खेमका महाराष्ट्र को लेकर काफी मुखर थे। उन्होंने 24 नवंबर को भी लिखा था कि महाराष्ट्र में चारों पार्टियां लोगों की सेवा का मौका चाह रही। इतना पैसा लगाया इसी मौके के लिए। जब इतनी प्रतिद्वंदिता जनसेवा का अवसर प्राप्त करने के लिए हो, तो देश की तरक्की भला क्यों न हो। आपको बता दें कि 1991 बैच के आईएएस खेमका की छवि ईमानदार अधिकारी की है। वे जिस विभाग में रहे, वहां अनियमितताओं का खुलकर विरोध किया। भाजपा से पहले कांग्रेस की हुड्डा सरकार में भी खेमका का 22 बार ट्रांसफर हुआ था।

 साभार-khaskhabar.com

 


संपादकीय

विशाल अग्रवाल ने बताया कि चालान सिर्फ ट्रफिक पुलिस काटे सभी पुलिस कर्मियों को इसकी जिम्मेदारी न दी जाये तो 50 प्रतिशत तक सही तरीके से काम हो पायेगा। जबकि आकाशवाणी के पूर्व उद्घोषक श्रीकृष्ण शरद, राकेश रावत एडवोकेट, पी0 के0 वार्ष्णेय, अरविन्द चौधरी, जगन्नाथ पौद्दार, पवन शर्मा, महेन्द्र राजपूत, जितेन्द्र गर्ग, सपन साहा, प्रताप विश्वास इन सभी ने माना कि इसमें पुलिस का फायदा अधिक होगा।  

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