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मध्य प्रदेश में डेंगू का कहर, 2915 मामले सामने आए, 2 की मौत

भोपाल। मध्य प्रदेश में डेंगू लगातार पैर पसार रहा है। इससे राज्य सरकार चिंतित है। राज्य में मंगलवार तक डेंगू के कुल 2915 मामले सामने आ चुके हैं, वहीं दो मरीजों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू व मलेरिया की रोकथाम के लिए अभियान छेड़ दिया है। राज्य के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तुलसीराम सिलावट ने भोपाल में डेंगू और मलेरिया की रोकथाम तथा इससे बचाव के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की और जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

समीक्षा बैठक में बताया गया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष प्रदेश में डेंगू प्रकरणों में कमी देखी गई है। पिछले वर्ष 2018 में प्रदेश में 4,997 प्रकरण और इस वर्ष 12 नवम्बर तक 2,915 प्रकरण सामने आए हैं। भोपाल जिले में डेंगू के 1384 प्रकरण प्रकाश में आए हैं। राजधानी में पांच सरकारी अस्पतालों एम्स, बी़ एम़ एच़ आऱ सी़, गांधी मेडिकल कॉलेज, सिविल अस्पताल बैरागढ़ और ज़ेपी़ अस्पताल में डेंगू और चिकुनगुनिया की एलाईजा आधारित जांच की नि:शुल्क व्यवस्था की गई है।

राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. हिमांशु जायसवाल ने बताया कि वर्ष 2019 में प्रदेश में डेंगू से मृत्यु के दो प्रकरण (एक जिला इन्दौर और एक जिला भोपाल) दर्ज किए गए हैं।

कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने समीक्षा के दौरान बताया कि भोपाल में डेंगू नियंत्रण के लिए 85 वार्डो को 19 जोन में बांटा गया है। प्रत्येक जोन के लिए एक नियंत्रण दल का गठन किया गया है, जिसमें 10 से 12 अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। इन दलों द्वारा प्रतिदिन अपने-अपने क्षेत्र में नियमित रूप से लार्वा नियंत्रण और फागिंग मशीन से धुंआ किया जा रहा है।

भोपाल नगर निगम आयुक्त बी़ विजय दत्ता ने बताया, "भोपाल में अब तक 1134 खाली पड़े भूखण्डों के मालिकों को नोटिस जारी किया गया है। करीब डेढ़ लाख रुपये का स्पॉट फाइन किया गया है। नगर निगम द्वारा 33 फागिंग मशीनों का उपयोग नियमित रूप से किया जा रहा है। नियंत्रण दलों द्वारा 4 लाख 30 हजार से अधिक घरों में लार्वा का सर्वे किया जा चुका है, जिसमें करीब 30 हजार घरों में लार्वा पाया गया है, जिन्हें नष्ट करने की कार्रवाई की गई है।"


साभार-khaskhabar.com